आज के दौर में जब Bollywood courtroom dramas अक्सर जरूरत से ज्यादा ड्रामा, ट्विस्ट और सनसनी पर निर्भर दिखाई देते हैं, ऐसे समय में ‘सिस्टम’ एक अलग और ज्यादा जमीनी कहानी लेकर आती है। डायरेक्टर Ashwiny Iyer Tiwari, जो Bareilly Ki Barfi और Nil Battey Sannata जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं, इस बार न्याय व्यवस्था, सत्ता और विशेषाधिकार (privilege) के जटिल रिश्तों को बड़े संवेदनशील तरीके से दिखाने की कोशिश करती हैं।
फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या कानून और न्याय वास्तव में सभी के लिए बराबर होते हैं, या फिर रसूख और ताकत अक्सर फैसलों की दिशा तय कर देते हैं। हालांकि कहानी में कुछ जगहों पर भावनात्मक गहराई और कोर्टरूम टकराव की तीव्रता थोड़ी कमजोर पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद ‘सिस्टम’ एक engaging और thought-provoking legal drama बनकर सामने आती है। खासतौर पर Sonakshi Sinha और Jyothika की शानदार एक्टिंग फिल्म को मजबूती देती है।
‘सिस्टम’ की कहानी
फिल्म की कहानी दो अलग-अलग दुनियाओं से आने वाली महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है — नेहा राजवंश और सारिका रावत।
नेहा राजवंश (Sonakshi Sinha) एक महत्वाकांक्षी सरकारी वकील है, जो एक प्रभावशाली कानूनी परिवार से ताल्लुक रखती है। वह अपने पिता रवि राजवंश (Ashutosh Gowariker) की प्रतिष्ठित लॉ फर्म में अपनी जगह बनाना चाहती है। लेकिन इसके लिए उसे एक कठिन शर्त पूरी करनी होती है — लगातार 10 केस जीतना, बिना एक भी हार के।
दूसरी ओर सारिका रावत (Jyotika) एक साधारण कोर्टरूम स्टेनोग्राफर है, जिसकी जिंदगी संघर्षों से भरी हुई है। उसकी दुनिया नेहा की privileged upbringing से बिल्कुल अलग है।
जैसे-जैसे नेहा हाई-प्रोफाइल केस लड़ती जाती है, फिल्म महत्वाकांक्षा, नैतिकता, privilege और survival के बीच की खाई को दिखाने लगती है। कहानी असली मोड़ तब लेती है, जब नेहा को अपनी दसवीं जीत के लिए कोर्ट में अपने ही पिता के खिलाफ खड़ा होना पड़ता है।
यहीं से फिल्म एक intense courtroom drama में बदल जाती है, जहां सच से ज्यादा ताकत और प्रभाव की अहमियत दिखाई देती है।
‘सिस्टम’ Movie Review
Ashwiny Iyer Tiwari ने हरमन बावेजा, अरुण सुकुमार और तस्नीम लोखंडवाला के साथ मिलकर फिल्म की कहानी लिखी है। Screenplay काफी हद तक gripping और easy-to-follow है। खास बात यह है कि फिल्म जरूरत से ज्यादा preachy नहीं बनती, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं को संतुलित तरीके से पेश करती है।
नेहा का किरदार सिर्फ कोर्टरूम जीतने तक सीमित नहीं है। वह अपने परिवार की legacy और अपनी पहचान के बीच लगातार संघर्ष करती दिखाई देती है। यही emotional conflict फिल्म को एक मजबूत आधार देता है।
हालांकि फिल्म का screenplay कुछ जगहों पर अपनी ही ambition के नीचे दबता नजर आता है। कई courtroom sequences में वह intensity और complexity नहीं दिखती, जिसकी उम्मीद एक बड़े legal drama से की जाती है। कुछ केस बहुत जल्दी सुलझते हुए महसूस होते हैं, जिससे suspense और emotional payoff थोड़ा कम हो जाता है।
लेकिन फिल्म का final act काफी मजबूत है। Climax में आने वाले twists कहानी को फिर से पकड़ लेते हैं और एक satisfying ending तक पहुंचाते हैं।
एक्टिंग कैसी है?
Sonakshi Sinha ने अपने करियर की सबसे restrained और mature performances में से एक दी है। वह नेहा के अंदर चल रहे emotional conflict को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारती हैं। खासकर Ashutosh Gowariker के साथ उनके confrontation scenes काफी दमदार बन पड़े हैं।
Jyotika फिल्म की emotional backbone साबित होती हैं। सारिका रावत के किरदार में वह simplicity, dignity और quiet strength लेकर आती हैं, जो दर्शकों को तुरंत connect करती है।
Ashutosh Gowariker सीमित स्क्रीन टाइम में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हैं।
Final Verdict
‘सिस्टम’ कोई परफेक्ट courtroom drama नहीं है, लेकिन यह एक socially relevant और emotionally engaging फिल्म जरूर है। फिल्म यह दिखाने में सफल रहती है कि न्याय व्यवस्था में सच और सत्ता के बीच का संतुलन कितना नाजुक हो सकता है।
अगर आपको realistic legal dramas, strong female characters और meaningful Bollywood stories पसंद हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है।
क्यों देखें?
- Sonakshi Sinha और Jyotika की शानदार एक्टिंग
- Powerful courtroom drama
- Emotional और socially relevant कहानी
- Strong climax और engaging twists
- OTT audience के लिए perfect watch
आप यह फिल्म Amazon Prime Video पर देख सकते हैं।



